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Pankaj Kapur

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संक्षेप में कहूं तो “दोपहरी” उपन्यास को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह हमारे अपने जीवन और पास पड़ोस से जुड़े ऐसे लोगों की कहानी है जो अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो चुके हैं तथा एकाकी जीवन व्यतीत करने के कारण उदासीन और निराश हो गए हैं।