Hindi Novels

Rekhankan by Rekha Droliya Book Review

रेखांकन (Rekhankan) | रेखा ड्रोलिया | पुस्तक समीक्षा

रेखा ड्रोलिया जी का यह प्रथम काव्य संकलन है और निस्संदेह यह विषय,भाव, लेखन, भाषा और शैली प्रत्येक दृष्टि से उत्कृष्ट है। इतना ही नहीं रेखा जी ने केवल पुरुष के प्रभुत्व का ही नहीं वरन उसके अंतर्मन की पीड़ा को अभिव्यक्त करने में भी सफलता प्राप्त की है ।इस संकलन में प्रकृति का सौंदर्य है तो प्रकृति के अंधाधुंध दोहन की पीड़ा भी है । उनकी इस कृति में एक और धर्म है तो दूसरी ओर धार्मिक स्थानों का भी मनोहारी चित्रण देखने को मिलता है ।

Uff Kolkata by Satya Vyas Book

उफ्फ कोलकाता (Uff Kolkata) | सत्य व्यास | पुस्तक समीक्षा

कथानक का आरंभ ट्रेन से होता है जिसमें दो मित्र सिद्धार्थ और रुद्र यात्रा कर रहे हैं। वे कानून के अध्ययन के लिए कोलकाता जा रहे हैं। सिद्धार्थ खिड़की के सहारे वाली सीट पर सो रहा है तभी आधी रात में उसे अपने पैरों के पास एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई दिखाई देती है। इसके बाद कहानी में रहस्य और रोमांच प्रारंभ हो जाता है। हॉस्टल में अनेक रहस्यमई और डरावनी घटनाएं घटित होने लगती हैं।

Balidanam बलिदानम् Manu Saunkhla Book Review

बलिदानम् (Balidanam) | मनु सौंखला | पुस्तक समीक्षा

जहां तक इस उपन्यास के कालक्रम का प्रश्न है यह 4000 वर्ष पूर्व पृथयानी राजवंश को लेकर रचा गया है, जिसके केंद्रबिंदु 2000 वर्ष (ईसा पूर्व) पृथयानी के राजा अश्रवण, रानी नंदिनी तथा उनका परिवार है।
अपने प्रारंभिक भाग में तो यह ऐतिहासिक परिवेश पर रची गई सामान्य कहानी प्रतीत होती है परंतु, जैसे-जैसे कहानी गति प्राप्त करती है उसमें एक नई सोच और सामाजिक क्रांति का बीजारोपण होता हुआ दिखाई देता है।

Reserved One Won by Manu Saunkhala

Reserved: One Won | Manu Saunkhala | Book Review

कहानी का प्रारंभ दो घनिष्ठ सहेलियों सनाया और अनन्या से होता है जो समाज के दो वर्गों सामान्य तथा आरक्षित से संबंध रखती हैं। इनमें से सनाया का चयन आरक्षण के आधार पर देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में हो जाता है जबकि अनन्या प्रवेश से वंचित रह जाती है। यहीं से इन दोनों सहेलियों की दोस्ती में दरार पड़ जाती है।

Einstein-Ka-Ankaha-Siddant-SS-Raw-Book-Review

Einstein Ka Ankaha Siddant (आइंस्टीन का अनकहा सिद्धांत) | S.S. Raw | Book Review

पुस्तक का शीर्षक “Einstein Ka Ankaha Siddant” विषय वस्तु के अनुसार सटीक है। यह मन में जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला है। विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत से तो प्रायः सभी परिचित हैं फिर यह कौन सा सिद्धांत है जो अभी तक रहस्य के पर्दे में छुपा हुआ है? यह प्रश्न कौतूहल उत्पन्न करता है।

Cric Panda Pon Pon Pon by Rishabh Pratipaksh

Cric Panda Pon Pon Pon (क्रिक पांडा पों पों पों) | ऋषभ प्रतिपक्ष | पुस्तक समीक्षा

Cric Panda Pon Pon Pon की सभी कहानियों में कहीं कोई दुराव-छिपा नहीं है क्योंकि ऋषभ प्रतिपक्ष ने जैसा पढ़ा , सुना, देखा और अनुभव किया उसकी सच्ची तस्वीर पाठकों के सम्मुख ज्यों की त्यों रख दी है।

Ibnebatuti-by-Divya-Prakash-Dubey

इब्नेबतूती (Ibnebatuti) | दिव्य प्रकाश दुबे | पुस्तक समीक्षा

दिव्य प्रकाश दुबे का उपन्यास “इब्नबतूती” पहले पन्ने से ही पाठकों को बांधे रखने में पूर्णतः समर्थ है | मैंने जब इस उपन्यास को पढ़ना प्रारंभ किया तो मुझे तब तक चैन नहीं आया जब तक मैंने इसे पूरा नहीं पढ़ लिया।

Aughad by Nilotpal Mrinal

औघड़ (Aughad) | नीलोत्पल मृणाल | पुस्तक समीक्षा

‘औघड़’ में एक ओर दलितों की सामाजिक स्थिति का वर्णन किया गया है तो दूसरी ओर बिहार और झारखंड के चुनावों में बाहुबलियों के प्रभुत्व को भी दर्शाया गया है। इसमें प्रेमचंद जी का यथार्थवाद है तो फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यासों की आंचलिकता भी है।

Musafir-dil-Shrinath-Choudhary

मुसाफिर Dil | श्रीनाथ चौधरी | पुस्तक समीक्षा

श्रीनाथ चौधरी का यह उपन्यास तपते रेगिस्तान में ठंडी हवा के झोंके की तरह सुखद अनुभूति कराता है | इस उपन्यास में कौतूहल, भावनाओं की मार्मिकता, प्रकृति का सौंदर्य, युवान के मित्र शौर्य का चंचल स्वभाव आदि अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो इसे रोचक और मनोरंजक बनाते हैं |

Dopehri-Pankaj-Kapur

दोपहरी | पंकज कपूर | पुस्तक समीक्षा

संक्षेप में कहूं तो “दोपहरी” उपन्यास को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह हमारे अपने जीवन और पास पड़ोस से जुड़े ऐसे लोगों की कहानी है जो अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो चुके हैं तथा एकाकी जीवन व्यतीत करने के कारण उदासीन और निराश हो गए हैं।