Einstein Ka Ankaha Siddant (आइंस्टीन का अनकहा सिद्धांत) | S.S. Raw | Book Review

 कहानी: 4.5/5
 पात्र: 4.5/5
 लेखन शैली: 4.5/5
 उत्कर्ष: 4/5
 मनोरंजन: 4/5 

Einstein Ka Ankaha Siddant पुस्तक को पढ़कर आज उससे जुड़ी बातों को मैं आप सभी से साझा करना चाहती हूं। यह पुस्तक अपने आपमे अनूठी है।

इसका शीर्षक ही पाठकों के मन में कौतूहल उत्पन्न करने वाला है।

मेरे हाथों में जैसे ही यह पुस्तक आई मुझे लगा कि संभवत यह वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर आधारित कोई नीरस और उबाऊ पुस्तक होगी, जिसे पढ़ना बहुत श्रम साध्य और बोरियत भरा होगा। परंतु,जब मैंने इसे पढ़ना आरम्भ किया तो मेरी जिज्ञासा प्रत्येक अध्याय के साथ बढ़ती ही चली गई तथा मेरा मन इसमें रमने लगा।

कभी-कभी तो मुझे लगता कि एक ही बार में इसे पढ़ लूं। परंतु ऐसा संभव नहीं था क्योंकि इसका कलेवर बहुत विस्तृत था।

जैसा कि मैं प्रत्येक पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करने से पूर्व पाठकों से रचनाकार का परिचय कराना जरूरी समझती हूं। इस पुस्तक के लेखक का संक्षेप में पाठकों से परिचय कराना चाहूंगी। “Einstein Ka Ankaha Siddant” के लेखक S.S. Raw का जन्म 1989 में हुआ था।

उनकी शिक्षा सेंट सोल्जर, पंचकूला में हुई। वर्तमान में वह भारतीय सीमा शुल्क एवं जी एस टी  विभाग , चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। उच्च शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद में भी उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन किए हैं तथा वह हरियाणा की तलवारबाजी टीम के सक्रिय सदस्य रहे हैं और उनकी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त किया है।

बचपन से ही चांद, सूरज,तारे आदि उन्हें आकर्षित करते थे। राजनीति तथा विज्ञान उनके प्रिय विषय रहे हैं। कल्पना जगत में भी उन्होंने ऊंची उड़ानें भरी हैं। फलस्वरूप इन सबके मिले-जुले रूप से ही इस पुस्तक का ताना-बाना बुना गया है।

रचनाकार ने 381 पृष्ठों की इस पुस्तक को 19 अध्यायों में विभाजित किया है तथा विषय एवं घटनाओं के आधार पर इन अध्यायों के शीर्षक निर्धारित किए हैं। प्रथम अध्याय “इतिहास की सैर” का आरंभ सन 2014 से हुआ है। इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे। जबकि भारतवर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में थे। यह वह समय था जब समूचा विश्व अनिश्चितता और आतंकवादी गतिविधियों से त्रस्त था।

धीरे-धीरे पुस्तक को आगे पढ़ने पर विषय स्पष्ट होने लगते हैं। अब हमें यह भी ज्ञात होने लगता है कि कड़ी सुरक्षा घेरों के बीच मशीनों और कंप्यूटर के माध्यम से इतिहास की सैर भी की जा सकती है।

यह पुस्तक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर आधारित है तथा इसमें महामानव अर्थात एलियन की परिकल्पना को भी साकार रूप प्रदान किया गया है।

दूसरे अध्याय में सीआईए के डायरेक्टर जॉन ब्रेनन पुनः अतीत में जाते हैं जहां सापेक्षता के सिद्धांत के अतिरिक्त उनको आइंस्टीन के एक ऐसे अनकहे सिद्धांत के विषय में भी जानकारी प्राप्त होती है जो आइंस्टीन की मृत्यु के कारण कभी सार्वजनिक नहीं हो सका और एक रहस्य ही बनकर रह गया। यह सिद्धांत लेखक की अपनी परिकल्पना पर आधारित है।

पुस्तक में आदि से अंत तक महामानव के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है तथा उन्हें वनमाहाम की संज्ञा दी गई है। लेखक का मानना है कि वैश्विक स्तर पर घटित होने वाली प्रत्येक घटना के पीछे वनमाहामों का ही हाथ है। घटना वह चाहे भारत विभाजन की हो, रूस को टुकड़ों में बांटने का कार्य हो, समूचे विश्व में आतंकवादी गतिविधियों का संचालन हो, सभी में एलियन अर्थात वनमाहाम सक्रिय भूमिका निभाते हैं। जिनकी विस्तृत विवेचना तीसरे अध्याय में की गई है।

ये वनमाहाम मानवों में इस प्रकार घुलमिल जाते हैं कि इन्हें अलग करना असंभव सा ही है। इनकी पहचान करने के लिए वैज्ञानिकों ने डी एन ए टैस्ट की एक नई और विशेष पद्धति का विकास किया है।

उत्तरोत्तर कहानी विकास की ओर बढ़ती चली जाती है और पाठकों का परिचय एक नई गुप्तचर सेवा प्लस ई से होता है। इस अध्याय में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आर्थिक सलाहकार डॉक्टर रघुराम राजन द्वारा वैश्विक मंदी को लेकर की गई भविष्यवाणियां, प्रधानमंत्री मोदी जी का भारतीय संस्कृति के अनुसार विभिन्न समस्याओं के समाधान सुझाना और उनका सफल भी होना,  शब्द के समवेत उच्चारण के लाभ, व्यवसाई के रूप में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन, मध्य पूर्व के देशों में आतंकवाद का पनपना, सीरिया, अफगानिस्तान और इराक में गृह युद्ध के कारण प्रवासीय समस्या से जूझना, अलकायदा और लादेन का बढ़ती हुई आतंकवादी गतिविधियां आदि महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन इस अध्याय को विकास की ओर ले जाता है | इसी दौरान लेखक की कल्पना शक्ति से वनमाहामों के बागी जिन्हें आरोहणम कहा गया है, अवतरित होते हैं।

अन्य अध्यायों में कुर्दों की बहादुरी, पेरिस में बम धमाके, लादेन का सीरिया से पाकिस्तान भाग जाना, भारतीय वायु सेना केंद्र पर पाक आतंकियों का हमला, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल से सी.आई.ए. के डायरेक्टर जॉन ब्रेनन की भेंट आदि अनेकानेक घटनाओं को आधार बनाकर अद्भुत कल्पनाशीलता और विज्ञान के समन्वय से लेखक ने कथानक के रूप में जो सौंदर्य और अनूठापन प्रदान किया है, वह प्रशंसा के योग्य है।

अनगिनत घटनाओं को विज्ञान की कसौटी पर कस कर जिस कुशलता से रचनाकार ने एक सूत्र में पिरोया है वह उनके कुशल लेखन का परिचायक है। इतना विशद विषय होने पर भी कथानक में कहीं भी उलझाव और टकराव नहीं है। वरन वह सीधी सरल रेखा की तरह अपने अभीष्ट में सफल होता है, जिसका अनुभव इस पुस्तक को बहुत ध्यान पूर्वक पढ़ने के पश्चात ही प्राप्त किया जा सकता है।

जहां तक S.S. Raw की लेखन-कला और शैली का प्रश्न है उन्होंने ऐसी हिंदी भाषा को अपनाया है जो ना तो साहित्यिक है और ना ही पूर्णत: व्यवहारिक। नई पीढ़ी के लेखकों को अंग्रेजी शब्दों का हिंदी में बहुतायत से प्रयोग करते देखा जा सकता है परंतु इस पुस्तक के लेखक ऐसे प्रयोगों से सर्वथा दूर है। इतना अवश्य है कि उनकी हिंदी सहज और सरल है तथा विज्ञान के तथ्यों को सुगमता से प्रस्तुत करने में पूरी तरह से समर्थ है। इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करने के लिए वह बधाई के पात्र हैं।

जटिल विषय को लेकर लिखी गई पुस्तक में भाषा प्रयोग प्रायः बहुत सोच-समझ कर किया जाता है परंतु लेखक की भाषा में कहीं किसी प्रकार की कोई गलती नहीं दिखाई देती। अतः भाषा की दृष्टि से यह एक सफल कृति है। लेखक ने अपनी इस रचना के द्वारा एक नई लेखन शैली को जन्म दिया है जिसे उन्होंने पुस्तक के प्रारंभ में स्पष्ट भी किया है।

“Einstein Ka Ankaha Siddant” में यदि देखा जाए तो पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। परंतु यदि थोड़ी सावधानी और ध्यान पूर्वक पुस्तक को पढ़ा जाए तो सभी पात्रों, उनकी मन: स्थितियों, उनके क्रियाकलापों तथा उनकी चरित्र गत विशेषताओं को आसानी से समझा जा सकता है। 

जॉन ब्रेनन,हौकिंग,हौफमैन, लादेन, बगदादी, कुर्द सैनिक, बराक ओबामा, नरेंद्र मोदी आदि कथानक की रीढ़ हैं और इनके बिना पुस्तक को पूरा किया ही नहीं जा सकता था।

पुस्तक का आरंभ तो 2014 से होता है परंतु मशीनों के माध्यम से इतिहास में पहुंचने के कारण इसकी शुरुआत 19वीं सदी से होती है तथा इसका समापन राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल तक हो जाता है।

इस दौरान सी.आई.ए. और प्लस-ई के डायरेक्टर जॉन ब्रेनन के सामने वैश्विक चुनौतियां कम नहीं हुई और वह इन चुनौतियों से अपनी सूझबूझ एवं साहस से निपटने के लिए दोबारा तत्पर हो जाते हैं |

पुस्तक का शीर्षक “Einstein Ka Ankaha Siddant” विषय वस्तु के अनुसार सटीक है। यह मन में जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला है। विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत से तो प्रायः सभी परिचित हैं फिर यह कौन सा सिद्धांत है जो अभी तक रहस्य के पर्दे में छुपा हुआ है? यह प्रश्न कौतूहल उत्पन्न करता है।

उपन्यास विश्व की गंभीर समस्याओं को प्रस्तुत करता है, उनके कारणों को खोजने का प्रयास करता है। इस पुस्तक को मनोरंजन की दृष्टि से बिल्कुल भी नहीं लिखा गया है इसलिए यह ऐसे पाठकों के लिए नहीं है जो हल्की-फुल्की पुस्तकें केवल टाइम पास करने के लिए पढ़ते हैं ।

इस पुस्तक को पढ़ने की सलाह मैं उन लोगों को देना चाहूंगी जो गंभीर विषयों को पसंद करते हैं, विज्ञान में रुचि रखते हैं, समसामयिक घटनाओं पर पैनी दृष्टि रखते हैं और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानना और समझना चाहते हैं।

लेखक की दृष्टि, उनकी सोच, ब्रह्मांड के प्रति उनकी उत्सुकता ने ही उन्हें इतनी कम आयु में उत्कृष्ट कृति के लेखन में सफलता प्रदान की है। मेरा पाठकों से अनुरोध है कि वे इसे एक बार अवश्य पढ़ें। तभी इसकी सार्थकता को समझ पाएंगे और इस अनूठी पुस्तक से लाभान्वित हो सकेंगे।

इतनी ज्ञानवर्धक, रोचक तथा उत्कृष्ट कृति लेखन के लिए S.S. Raw बधाई के पात्र हैं। मुझे उनकी आगामी पुस्तक का भी बेसब्री से इंतजार रहेगा।

आप इस पुस्तक को खरीदने के लिए इस लिंक का प्रयोग कर सकते हैं |

Amazon

Leave a Comment